सांख्य योग – Sankhya Yog
भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय ‘सांख्य योग’ ज्ञान और कर्म के समन्वय का दार्शनिक आधार प्रस्तुत करता है। विषादग्रस्त अर्जुन को संबोधित करते हुए कृष्ण आत्मा की नित्य, अविनाशी और अजर-अमर सत्ता का प्रतिपादन करते हैं। वे समझाते हैं कि शरीर नश्वर है, पर आत्मा शाश्वत है; अतः मोह और शोक …