सांख्य योग – Sankhya Yog

भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय ‘सांख्य योग’ ज्ञान और कर्म के समन्वय का दार्शनिक आधार प्रस्तुत करता है। विषादग्रस्त अर्जुन को संबोधित करते हुए कृष्ण आत्मा की नित्य, अविनाशी और अजर-अमर सत्ता का प्रतिपादन करते हैं। वे समझाते हैं कि शरीर नश्वर है, पर आत्मा शाश्वत है; अतः मोह और शोक …

Read more

भगवद गीता अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग – Arjun Vishad Yoga

भगवद्गीता का प्रथम अध्याय ‘अर्जुन विषाद योग’ मानव मनोविज्ञान की सूक्ष्मतम परतों को उद्घाटित करता है। युद्धभूमि के मध्य खड़े अर्जुन, कुरुक्षेत्र में अपने ही बंधु-बांधवों को सम्मुख देखकर करुणा, मोह और कर्तव्य-संकट से व्याकुल हो उठते हैं। वे शौर्य के स्थान पर नैतिक दुविधा को अनुभव करते हुए शस्त्र …

Read more

श्रीमद्भगवद्गीता – Shrimad Bhagwad Gita

श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय सनातन ज्ञान परम्परा का एक अमूल्य रत्न है, जिसे गीता के संक्षिप्त नाम से भी संबोधित किया जाता है। यह ग्रन्थ महाभारत के भीष्म पर्व का एक अंश है, जिसमें कुल 700 श्लोक सम्मिलित हैं। गीता न केवल धर्म, कर्म और मोक्ष की अवधारणाओं को स्पष्ट करती है, …

Read more