अर्जुन विषाद योग – Arjun Vishad Yoga

गीता का प्रथम अध्याय ‘अर्जुन विषाद योग’ है, जिसमें युद्धभूमि में खड़े अर्जुन मानसिक और नैतिक दुविधा में डूब जाते हैं। वे अपने कुटुम्बजनों के वि7रुद्ध युद्ध करने से विचलित होकर शस्त्र त्याग देना चाहते हैं। यह अध्याय मनुष्य की प्रारंभिक जिज्ञासा, मोह और असमंजस को दार्शनिक संवाद हेतु पृष्ठभूमि प्रदान करता है।


श्लोक – 1

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श्लोक – 2

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श्लोक – 3

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श्लोक – 4

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श्लोक – 5

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श्लोक – 6

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श्लोक – 7

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श्लोक – 8

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श्लोक – 9

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श्लोक – 10

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श्लोक – 11

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श्लोक – 12

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श्लोक – 13

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श्लोक – 14

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श्लोक – 15

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श्लोक – 16

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श्लोक – 17-18

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श्लोक – 19

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श्लोक – 20-21

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श्लोक – 22

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श्लोक – 23

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श्लोक – 24-25

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श्लोक – 26-27

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श्लोक – 27-28

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श्लोक – 28-29

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श्लोक – 30

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श्लोक – 31

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श्लोक – 32

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श्लोक – 33

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श्लोक – 34

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श्लोक – 35

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श्लोक – 36

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श्लोक – 37

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श्लोक – 38-39

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श्लोक – 40

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श्लोक – 41

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श्लोक – 42

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श्लोक – 43

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श्लोक – 44

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श्लोक – 45

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श्लोक – 46

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श्लोक – 47

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1 thought on “अर्जुन विषाद योग – Arjun Vishad Yoga”

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