इंडीगो, भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन, हाल ही में एक बड़े ऑपरेशनल संकट का सामना कर रही है जिसमें एक ही दिन में सैकड़ों से लेकर हजारों उड़ानों के रद्द होने और देरी का सिलसिला चला। कंपनी ने यह कदम अपने शेड्यूल को स्थिर करने और क्रू-रॉस्टर को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश के तौर पर बताया, जबकि नियामक और यात्रियों ने कंपनी की तैयारी और प्रबंधन पर सवाल उठाए।
मुख्य कारण और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
रिपोर्टों के अनुसार, समस्या का प्रमुख कारण नए Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियमों के लागू होने के बाद पायलट और कॉकट-क्रू के शेड्यूलिंग में आई कमी और क्रू-संकट था। इस बदलाव ने पायलटों के रेस्ट-पीरियड और रात की ड्यूटी पर प्रभाव डाला, जिससे कंपनी को अचानक कई उड़ानों की रद्दीकरण करनी पड़ी। केंद्रीय प्रशासक निकाय ने संकट को देखते हुए अस्थायी नियम राहत दी और कुछ नियमों पर तात्कालिक छूट भी घोषित की गई।
यात्रियों पर असर और सरकारी कदम
हजारों यात्रियों को हवाई अड्डों पर फंसा देखा गया; कई यात्रियों ने रिफंड और रूट-रिअरेन्जमेंट में देरी की शिकायत की। केंद्र सरकार ने इंडिगो को लंबित रिफंड क्लियर करने का आदेश दिया और कुछ मार्गों पर किराए पर नियंत्रण लगाने की घोषणा की, ताकि यात्रियों को तात्कालिक राहत मिल सके। नियामक संस्थाएँ भी कंपनी के आंतरिक प्रबंधन और लंबित शिकायतों की जांच कर रही हैं।
कंपनी की प्रतिक्रिया
इंडीगो के सीईओ ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और कहा कि यह एक शॉर्ट-टर्म स्थिरीकरण प्रक्रिया है जिसके तहत सेवाओं को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। उसने यात्रियों के असुविधा के लिए खेद जताया और रूटीन पुनर्संगठन के तहत शीघ्र सुधार का आश्वासन दिया। साथ ही कंपनी ने प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक बातें और रिफंड प्रक्रिया को तेज़ करने का भरोसा दिलाया।
निष्कर्ष और संचयी प्रभाव
विश्लेषक यह मानते हैं कि यह संकट भारत की नागरिक उड्डयन क्षमता और शेड्यूल-मैनेजमेंट की नाजुकता को दर्शाता है। लंबे समय में यह घटना एयरलाइन्स की योजना, नियामकीय सतर्कता और उपभोक्ता-सुरक्षा नीतियों पर प्रभाव छोड़ सकती है। यात्रियों के भरोसे और इंडस्ट्री-रियूटिंग पर इसके दूरगामी प्रभाव पर निगरानी जारी है।
प्रमुख बिंदु (Bold/Italic pointers)
- किसका असर? — सैकड़ों से हजारों यात्री और कई प्रमुख घरेलू हब प्रभावित।
- क्यों हुआ? — नए क्रू-ड्यूटी नियमों और शेड्यूल-प्रबंधन का तालमेल न बैठना।
- सरकारी कदम — अस्थायी नियम राहत, रिफंड आदेश और किराया नियंत्रण की घोषणा।