बिहार के भौतिक विभाग (मैदान व पठार) – Physical Divisions of Bihar (Plains & Plateau)

संरचना (Structure) एवं उच्चावच (Relief) की भिन्नता के आधार पर बिहार को तीन प्रमुख भौतिक विभागों में बांटा जाता है — शिवालिक पर्वतीय प्रदेश (उत्तर-पश्चिम में एक संकरी पट्टी), गंगा का मैदान (राज्य का लगभग 96% भाग) तथा छोटानागपुर सीमांत पठारी प्रदेश (दक्षिण में एक संकरी पट्टी)। यह लेख तीनों भौतिक विभागों की विशेषताओं, उप-विभाजनों और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को विस्तार से बताता है।

फैक्ट बॉक्स — तीन भौतिक विभाग एक नज़र में

भौतिक विभागस्थितिक्षेत्रफल / विस्तार
शिवालिक पर्वतीय प्रदेशउत्तर-पश्चिम (पश्चिम चंपारण का उत्तरी भाग)संकरी पट्टी, रामनगर दून: 214 वर्ग किमी
गंगा का मैदानसंपूर्ण मध्य बिहार (उत्तरी + दक्षिणी मैदान)90,650 वर्ग किमी (राज्य का 96.27%)
छोटानागपुर सीमांत पठारदक्षिण (कैमूर से बांका तक संकरी पट्टी)शेष लगभग 3,513 वर्ग किमी

नोट: गंगा के दक्षिणी मैदान का क्षेत्रफल 33,670 वर्ग किमी है (विभिन्न BPSC अध्ययन-सामग्रियों में सुसंगत रूप से उद्धृत), शेष उत्तरी मैदान में आता है। पठारी भाग का सटीक क्षेत्रफल स्रोतों में थोड़ा भिन्न बताया गया है — परीक्षा से पूर्व नवीनतम आधिकारिक आंकड़ा अवश्य जांच लें।

1. शिवालिक पर्वतीय प्रदेश (उत्तर-पश्चिम)

यह प्रदेश बिहार के उत्तर-पश्चिमी कोने में, पश्चिम चंपारण जिले के उत्तरी भाग तक ही सीमित है। यह हिमालय की सबसे बाहरी एवं सबसे नवीन श्रेणी (शिवालिक) का विस्तार है, जो नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा भी बनाती है।

  • सोमेश्वर श्रेणी — नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाने वाली प्रमुख पहाड़ी श्रृंखला
  • रामनगर दून — तराई क्षेत्र का सबसे दक्षिणी भाग, लगभग 214 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत
  • यह क्षेत्र सेनोज़ोइक (Cenozoic) युग में निर्मित माना जाता है
  • यहां 140 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा के कारण भूमि कृषि योग्य कम है

2. गंगा का मैदान (राज्य का मुख्य भाग)

गंगा का मैदान बिहार के कुल क्षेत्रफल का लगभग 96.27% भाग कवर करता है और उत्तर में शिवालिक श्रेणी से लेकर दक्षिण में छोटानागपुर पठार तक फैला हुआ है। भूगर्भीय दृष्टि से यह एक अग्रगभीर (Foredeep) मैदान है, जिसकी औसत ऊंचाई समुद्र तल से 75-120 मीटर तक है (150 मीटर की समोच्च रेखा द्वारा निर्धारित)। मैदान का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर अत्यंत मंद (लगभग 5-6 सेमी प्रति किमी) है। गंगा नदी इस विशाल मैदान को दो असमान भागों में बांटती है — उत्तरी गंगा का मैदान और दक्षिणी गंगा का मैदान।

(अ) उत्तरी गंगा का मैदान

यह भाग गंगा के उत्तर में स्थित है और शिवालिक की तलहटी से शुरू होकर गंगा तट तक फैला है। इसके अंतर्गत दो उप-प्रदेश आते हैं:

  • तराई प्रदेश — उत्तर-पश्चिमी (पश्चिम चंपारण) एवं उत्तर-पूर्वी (पूर्णिया, अररिया, किशनगंज) भागों में विस्तृत; यहां 150-200 सेमी तक वार्षिक वर्षा होती है, जिससे घने वन एवं दलदली भूमि का विकास हुआ है। उत्तर-पूर्वी तराई (पूर्णिया-अररिया-किशनगंज) बिहार का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है।
  • मुख्य उत्तरी मैदान — गंडक, कोसी, बागमती, घाघरा जैसी हिमालयी नदियों द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदान, जो प्रतिवर्ष बाढ़ की समस्या से ग्रस्त रहता है।

(ब) दक्षिणी गंगा का मैदान

यह मैदान गंगा नदी और दक्षिण के सीमांत पठारी प्रदेश के बीच स्थित है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 33,670 वर्ग किलोमीटर है। इसका ढाल दक्षिण से उत्तर की ओर है तथा इसका निर्माण पठारी क्षेत्र से बहकर आने वाली नदियों (पुनपुन, सोन, फल्गु, किऊल आदि) के निक्षेप से हुआ है। इसके भी प्रमुख उप-भाग हैं:

  • दोआब प्रदेश — पटना, जहानाबाद, गया, नालंदा, औरंगाबाद, अरवल, लखीसराय एवं नवादा जिलों को कवर करता है; यह अपेक्षाकृत कम वर्षा वाला क्षेत्र है, जहां प्रायः सूखे की स्थिति बनती है।
  • मगध का मैदान — त्रिकोणीय आकार का मैदान (लगभग 1,230 वर्ग किमी), जो गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, पटना, नालंदा एवं नवादा जिलों में फैला है; उत्तर में गंगा, पश्चिम में सोन नदी तथा दक्षिण में दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र से घिरा।
  • टाल क्षेत्र — गंगा के समानांतर बहने वाली सहायक नदियों (जैसे फल्गु) के कारण बना दलदली/निचला भाग, जो पीनेट प्रवाह प्रणाली (Pinnate Drainage System) का उदाहरण है — पटना की दक्षिणी सीमा के निकट स्थित।

उल्लेखनीय है कि पटना नगर एक प्राकृतिक कगार (natural levee) पर बसा है, जिसकी ऊंचाई आसपास के भू-भाग से अधिक होने के कारण दक्षिणी बिहार की अधिकांश नदियां गंगा में सीधे न मिलकर उसके समानांतर बहती हैं।

3. छोटानागपुर सीमांत पठारी प्रदेश (दक्षिण)

यह बिहार के दक्षिणी सिरे पर छोटानागपुर पठार (झारखंड) के उत्तरी विस्तार के रूप में एक संकरी पट्टी में फैला हुआ है, जो कैमूर जिले से लेकर बांका जिले तक जाती है। वर्ष 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद बिहार के हिस्से में इस पठार का केवल सीमांत (fringe) भाग ही शेष रह गया।

  • प्रमुख जिले: कैमूर, रोहतास, जमुई, नवादा, बांका, मुंगेर, भागलपुर, गया
  • अवशिष्ट पहाड़ियां: गया (266 मी.), राजगीर (466 मी.), बराबर, गिरियक, शेखपुरा, जमालपुर एवं खड़गपुर (510 मी.) — ये जहानाबाद, नालंदा एवं मुंगेर जिलों में स्थित हैं
  • शैल संरचना: धारवाड़ चट्टानें — जमुई, नवादा, मुंगेर (दक्षिण-पूर्व बिहार); विंध्यन चट्टानें — कैमूर, रोहतास (दक्षिण-पश्चिम बिहार)
  • यह भाग कर्मनासा, सोन, पुनपुन, फल्गु, किऊल, हरोहर जैसी नदियों का उद्गम/प्रवाह क्षेत्र है

तुलनात्मक सारणी — तीनों भौतिक विभाग

बिंदुशिवालिक प्रदेशगंगा का मैदानसीमांत पठार
स्थितिउत्तर-पश्चिममध्य (सर्वाधिक विस्तृत)दक्षिण
भू-आकृतिपर्वतीय/तराईजलोढ़ मैदानपठारी/अवशिष्ट पहाड़ियां
वर्षाअधिक (140+ सेमी)मध्यम (उत्तर में अधिक)अपेक्षाकृत कम
मुख्य उपयोगवन, सीमित कृषिगहन कृषि (धान, गेहूं, गन्ना)खनन एवं सीमित कृषि

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)

  • बिहार के 3 भौतिक विभाग: शिवालिक पर्वतीय प्रदेश, गंगा का मैदान, छोटानागपुर सीमांत पठार
  • गंगा का मैदान राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 96.27% भाग कवर करता है
  • दक्षिणी गंगा मैदान का क्षेत्रफल: 33,670 वर्ग किमी
  • मगध का मैदान त्रिकोणीय आकार का है, क्षेत्रफल लगभग 1,230 वर्ग किमी
  • रामनगर दून (214 वर्ग किमी) तराई क्षेत्र का सबसे दक्षिणी भाग है
  • पूर्णिया-अररिया-किशनगंज तराई बिहार का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है
  • टाल क्षेत्र में पीनेट प्रवाह प्रणाली (Pinnate Drainage) पाई जाती है
  • दक्षिणी पठारी भाग में धारवाड़ (जमुई-नवादा-मुंगेर) व विंध्यन (कैमूर-रोहतास) दोनों प्रकार की चट्टानें मिलती हैं

निष्कर्ष

बिहार का भौतिक स्वरूप — उत्तर में पर्वतीय तराई, मध्य में विशाल उपजाऊ मैदान तथा दक्षिण में पठारी अवशेष — राज्य की कृषि, जलवायु, अपवाह तंत्र एवं बसावट के प्रतिरूप को गहराई से प्रभावित करता है। BPSC, SSC एवं रेलवे परीक्षाओं में इन तीनों विभागों के उप-भागों, क्षेत्रफल एवं जिलों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बिहार को कितने भौतिक विभागों में बांटा गया है?

बिहार को तीन प्रमुख भौतिक विभागों में बांटा गया है — शिवालिक पर्वतीय प्रदेश, गंगा का मैदान तथा छोटानागपुर सीमांत पठारी प्रदेश।

गंगा का मैदान बिहार के कुल क्षेत्रफल का कितना भाग कवर करता है?

गंगा का मैदान बिहार के कुल क्षेत्रफल का लगभग 96.27% भाग (90,650 वर्ग किमी) कवर करता है।

दक्षिणी गंगा के मैदान का क्षेत्रफल कितना है?

दक्षिणी गंगा के मैदान का क्षेत्रफल लगभग 33,670 वर्ग किलोमीटर है।

मगध का मैदान किन जिलों में फैला है?

मगध का मैदान गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, पटना, नालंदा एवं नवादा जिलों में फैला हुआ है।

बिहार का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र कौन सा है?

उत्तर-पूर्वी तराई प्रदेश (पूर्णिया, अररिया एवं किशनगंज जिले) बिहार का सर्वाधिक वर्षा ग्रहण करने वाला क्षेत्र है।

टाल क्षेत्र किस प्रकार की प्रवाह प्रणाली के लिए जाना जाता है?

टाल क्षेत्र पीनेट प्रवाह प्रणाली (Pinnate Drainage System) के लिए जाना जाता है, जहां नदियां गंगा में सीधे मिलने के बजाय उसके समानांतर बहती हैं।

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