हिंदी व्यास
श्रीमद्भगवद्गीता › अध्याय १ — अर्जुन विषाद योग
श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय १
अर्जुन विषाद योग
भगवद्गीता का प्रथम अध्याय मानव मनोविज्ञान की सूक्ष्मतम परतों को उद्घाटित करता है। युद्धभूमि के मध्य खड़े अर्जुन, कुरुक्षेत्र में अपने ही बंधु-बांधवों को सम्मुख देखकर करुणा, मोह और कर्तव्य-संकट से व्याकुल हो उठते हैं। यह विषाद केवल दुर्बलता नहीं, बल्कि आत्मचिंतन की शुरुआत है, जो आगे चलकर कृष्ण के दिव्य उपदेशों का आधार बनती है।